नवरात्री के दौरान बठुकम्मा मनाया जाता है | इसकी शुरुआत दशहरा से ११ दिन पहले होती है और ९ दिन के इस उत्सव का समापन दुर्गा अष्टमी को पेद्दा बठुकम्मा के रूप में होता है |बठुकम्मा के बाद आता है बोद्देम्मा त्यौहार जो की ७ दिनों तक चलता है| जहाँ बोद्देम्मा त्यौहार  वर्षा ऋतू के समापन का प्रतीक होता है वहीँ बठुकम्मा त्यौहार पतझड़ की शुरुआत की तरफ इशारा करता है  | 

 इस त्यौहार की शुरुआत सती के शिव के अपमान के विरुद्ध प्राण त्यागने से शुरू हुआ था | इसके इलावा आजकल ये त्यौहार तेलंगाना के संस्कृति और परंपरा को दर्शाने का प्रतीक बन गया है | इस त्यौहार की ख़ूबसूरती ये है की ये कई समुदायों को जोड़ता है | अलग परिवार और पृष्ठभूमि के लोग सार्वजानिक स्थानों पर मिलते हैं और अपनी प्रिय देवी को प्रार्थना अर्पण करते हैं | 


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